हरिद्वार में राष्ट्रीय संगोष्ठी: अंगदान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान, जेपी नड्डा और सीएम धामी ने दिया मानव सेवा का संदेश

Call to turn organ donation into a mass movement

Call to turn organ donation into a mass movement

हरिद्वार। National Seminar in Haridwar, देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज में दधीचि अंगदान संकल्प अभियान के तहत आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंगदान को मानवता की सर्वोच्च सेवा बताते हुए इसे जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में देशभर से आए विशेषज्ञों, चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और साधकों ने अंगदान के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए तथा बड़ी संख्या में लोगों ने मानव सेवा के लिए अंगदान का संकल्प लिया।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि अंगदान ऐसा पुण्य कार्य है, जो किसी गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को नया जीवन प्रदान कर सकता है। अंगदान को केवल वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी समझने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रभावी और जन-केंद्रित बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

अंगदान एवं अंग प्रत्यारोपण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत ढांचे का विस्तार किया गया है और राज्यों में भी संबंधित संस्थाओं को सक्रिय किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जन-जागरूकता बढ़ने से देश में अंगदान के मामलों में वृद्धि हुई है और जनभागीदारी के माध्यम से इसे व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति त्याग, समर्पण, सेवा और परमार्थ की महान परंपरा पर आधारित है।

महर्षि दधीचि के अद्वितीय त्याग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने मानवता और धर्म की रक्षा के लिए अपनी अस्थियों तक का दान कर दिया था।

इसी प्रकार राजा शिवि की कथा करुणा, दया और परोपकार की सर्वोच्च भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यदि मृत्यु के बाद किसी व्यक्ति का अंग किसी जरूरतमंद को नया जीवन दे सके, तो इससे बड़ा मानव कल्याण का कार्य कोई नहीं हो सकता।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पंड्या ने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति का मेरुदंड है।

यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि त्याग, सहयोग, कर्तव्यबोध और लोकमंगल की भावना को जागृत करने वाली जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि समाज के कल्याण के लिए अपने समय, श्रम और संसाधनों का समर्पण ही यज्ञ की वास्तविक भावना है।

इससे पूर्व अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक, रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी दयामूर्त्यानंद, डा. अनिल कुमार, पद्मश्री नीलेश मांडलेवाला, डा. विजय धस्माना सहित अनेक विशेषज्ञों ने अंगदान के वैज्ञानिक, सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए।

शांतिकुंज के आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उपस्थित लोगों को अंगदान का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर दायित्वधारी ओमप्रकाश जमदग्नि, प्रो. मीनू सिंह आदि मौजूद रहे।

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने का कार्य कर रही सरकार: धामी

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि केंद्र सरकार के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, चिकित्सा अवसंरचना के विकास और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।

प्रदेश सरकार भी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि अंगदान और अंग प्रत्यारोपण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकारी एवं निजी अस्पतालों, प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग और संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।

दून मेडिकल कालेज में राज्य के पहले सरकारी ऊतक प्रत्यारोपण केंद्र की स्थापना के साथ-साथ अंग प्रत्यारोपण केंद्रों, अंग बैंक तथा जिला स्तरीय अंगदान केंद्रों का नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर अंग उपलब्ध कराए जा सकें।

'हम बदलेंगे तो युग बदलेगा'

मुख्यमंत्री धामी ने अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा पिछले एक शताब्दी से आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने आध्यात्मिक चिंतन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जन-जन तक पहुंचाने का ऐतिहासिक कार्य किया। उनका संदेश 'हम बदलेंगे तो युग बदलेगा' आज भी समाज को सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देता है।